शिक्षा का अधिकार (आरटीई) भारत का एक मौलिक अधिकार है जो 3 से 7 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है। यह अधिकार 2002 के 86वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के माध्यम से अनुच्छेद 21ए के तहत भारतीय संविधान में जोड़ा गया था इस संवैधानिक प्रावधान को लागू करने के लिए भारत सरकार ने बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम बनाया। यह अधिनियम 2009 में पारित हुआ और 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में प्रभावी हुआ।आरटीई अधिनियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा आर्थिक सामाजिक या सांस्कृतिक कारणों से प्राथमिक शिक्षा से वंचित न रहे। यह शिक्षा को न केवल बच्चे का अधिकार बनाता है बल्कि सरकार का दायित्व भी बनाता है। इस अधिनियम के तहत, सरकार सरकारी स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के लिए बाध्य है। बच्चों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, वर्दी और अन्य आवश्यक शिक्षण सामग्री प्राप्त करने का अधिकार है ताकि आर्थिक कठिनाई उन्हें स्कूल जाने से न रोके।
निःशुल्क शिक्षा
सरकारी स्कूलों में कोई फीस नहीं ली जाएगी। किताबें, यूनिफॉर्म आदि भी मुफ्त दिए जाते हैं।
Private School
निजी स्कूलों में कक्षा 1 में 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित
जरुरी जानकारी
अनुसूचित जाति (SC)
अनुसूचित जनजाति (ST अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
दिव्यांग (Disabled) बच्चे
अनाथ / निराश्रित बच्चे
HIV प्रभावित बच्चे
सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चे
बच्चा संबंधित क्षेत्र / वार्ड / ग्राम पंचायत का निवासी हो।
स्थानीय निकाय द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र आवश्यक हो सकता है।
अन्य जानकारी
माता पिता का अधार कार्ड
बैंक पासबुक
निवास प्रमाण पत्र
आय प्रमाण पत्र
बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र
बच्चे का फोटो
मोबाइल नम्बर