प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (पीएम-एसवाईएम) भारत सरकार द्वारा 2019 में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए शुरू की गई एक सरकारी पेंशन योजना है। इस योजना की घोषणा वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट 2019 में की थी
एक वर्ष में 36000 हजार दिया जायेगा
1 अप्रैल से जून
2 जुलाई से सितंबर
3 अक्टूबर से दिसंबर
4 जनवरी से मार्च
कौन योजना के लिए पात्र है
भारत के सभी नागरिक आबेदन कर सकते है सड़क किनारे विक्रेता निर्माण श्रमिक घरेलू कामगार रिक्शा चालक कृषि श्रमिक छोटी दुकानों के कर्मचारी बीड़ी बनाने वाले, हथकरघा कामगार आदि जिनकी उम्रः 18 से 40 के बिच होना चाहिए महीने का इनकम 15000 हजार या उससे कम होना चाहिए
कौन योजना के लिए अपात्र है
जिनका उम्रः 1 से 18 वर्ष के बिच हो 40 के ऊपर होएप्लीकेंट ये नहीं होना चाहिए: EPFO (एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइज़ेशन) का मेंबर ESIC (एम्प्लॉई स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन) का मेंबर NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) का सब्सक्राइबर इनकम टैक्स स्टेटस पेयर नहीं होना चाहिए
पहचान प्रमाण
अधार कार्ड
बैंक पासबुक फोटो परिवार रजिस्टर नकल या राशन कार्ड आय प्रमाण पत्र मोबाइल नम्बर आदि
योगदान विवरण उम्रः के अनुसार
उम्रः 18
उम्रः 29
उम्रः 40
55 रूपए महिना
100 रूपए महिना
200 रूपए महिना
60 वर्ष तक जमा करना अनिवार्य है
लाभ
60 वर्ष पूरा होने पर
फैमिली पेंशन: सब्सक्राइबर की मौत होने पर, पति/पत्नी को पेंशन का लाभ 50% दिया जायेगा
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 में शुरू की गई एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। भारत में करोड़ों श्रमिक जैसे रेहड़ी-पटरी वाले, रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, निर्माण मजदूर, खेतिहर मजदूर, बीड़ी श्रमिक, छोटे दुकानदार आदि असंगठित क्षेत्र में कार्य करते हैं और उन्हें किसी प्रकार की नियमित पेंशन या सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिलता।इस प्रकार, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था में आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए Government of India ने इस योजना की शुरुआत की, ताकि श्रमिक 60 वर्ष की आयु के बाद सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। यह एक स्वैच्छिक (Voluntary) और अंशदायी (Contributory) पेंशन योजना है, जिसमें लाभार्थी अपनी आयु के अनुसार मासिक अंशदान जमा करता है और सरकार भी उतनी ही राशि का योगदान करती है। योजना के अंतर्गत 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर लाभार्थी को प्रतिमाह 3,000 की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन दी जाती है। यदि लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी पत्नी/पति को पेंशन का 50% पारिवारिक पेंशन के रूप में मिलता है।